मंगलवार, 14 अक्टूबर 2025

Selaginella Complete Study | Assignment for Bsc 3rd Sem | Future Edu Career


सिलेजिनेला (Selaginella) 



1.1. सामान्य परिचय एवं ऐतिहासिक संदर्भ (General Introduction and Historical Context)


सिलेजिनेला (Selaginella) पादप जगत के प्रभाग लाइकोफाइटा (Lycophyta) के अंतर्गत आने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विशाल जीनस है। इसे सामान्यतः ‘स्पाइक मॉस’ (spike moss) या ‘लेसर क्लब मॉस’ (lesser club moss) के नाम से जाना जाता है 1। लगभग 700 से 800 ज्ञात प्रजातियों के साथ, यह संवहनी पौधों (

vascular plants) के सबसे बड़े जेनेरा में से एक है 1। यह अपने कुल सिलेजिनेलेसी (

Selaginellaceae) और गण सिलेजिनेलेल्स (Selaginellales) का एकमात्र जीवित जीनस है, जो इसे अपने आप में अद्वितीय बनाता है 1। सिलेजिनेला को अक्सर एक ‘जीवित जीवाश्म’ (

living fossil) के रूप में संदर्भित किया जाता है क्योंकि इसके जीवाश्म रिकॉर्ड लेट कार्बोनिफेरस काल (Late Carboniferous period), यानी लगभग 300 मिलियन वर्ष पूर्व, से मिलते हैं 3। तब से लेकर आज तक, इसने बिना किसी बड़े रूपात्मक संशोधन के अपना अस्तित्व बनाए रखा है, जो इसके विकासवादी लचीलेपन और स्थायित्व का प्रमाण है 5। सिलेजिनेला का अध्ययन एक विरोधाभास को उजागर करता है: यह कई आदिम विशेषताओं को बनाए रखता है, फिर भी इसने असाधारण पारिस्थितिक सफलता और विविधीकरण हासिल किया है। यह केवल एक अवशेष नहीं है जो जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहा है, बल्कि यह अनुकूलन का एक विकासवादी मास्टर है। इसका आदिम टूलकिट, जिसमें हेटेरोस्पोरी (

heterospory), सरल माइक्रोफिल्स (microphylls) और राइजोफोर (rhizophore) शामिल हैं, एक बाधा नहीं बल्कि विभिन्न बायोम में अनुकूलन और विकिरण के लिए एक अत्यधिक लचीला मंच साबित हुआ है।


1.2. प्राप्ति स्थान एवं वितरण (Occurrence and Distribution)


सिलेजिनेला का वितरण विश्वव्यापी (cosmopolitan) है, जो इसकी असाधारण अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है। यह जीनस उष्णकटिबंधीय वर्षावनों (tropical rainforests) की नम और छायादार भूमि से लेकर आर्कटिक-अल्पाइन क्षेत्रों की ठंडी परिस्थितियों और शुष्क रेगिस्तानों तक में पाया जाता है 3। अधिकांश प्रजातियाँ नम और छायादार स्थानों को पसंद करती हैं, जहाँ वे सघन आवरण बनाती हैं 1। हालाँकि, कुछ प्रजातियाँ शुष्क या ज़ेरोफिटिक (

xerophytic) परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होती हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण Selaginella lepidophylla है, जिसे ‘पुनर्जीवन पौधा’ (resurrection plant) भी कहा जाता है, जो अत्यधिक निर्जलीकरण की स्थिति में एक सूखी गेंद में बदल जाता है और नमी मिलने पर फिर से हरा-भरा हो जाता है 1। भारत में, सिलेजिनेला की लगभग 70 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो मुख्य रूप से पूर्वी और पश्चिमी हिमालय के साथ-साथ दक्षिण भारत की पहाड़ियों में वितरित हैं 1।


1.3. वानस्पतिक एवं विकासवादी महत्व (Botanical and Evolutionary Significance)


सिलेजिनेला संवहनी क्रिप्टोगैम्स (vascular cryptogams) के लाइकोफाइटा (Lycophyta) प्रभाग से संबंधित है और इसे अक्सर "फर्न सहयोगी" (fern allies) के समूह में शामिल किया जाता है 2। यह लाइकोपोड्स का सबसे सफल जीवित जीनस है 9। इसका सबसे महत्वपूर्ण विकासवादी योगदान विषमबीजाणुता (

heterospory) की उपस्थिति है, जिसमें दो अलग-अलग प्रकार के बीजाणु (spores) - छोटे नर माइक्रोस्पोर (microspores) और बड़े मादा मेगास्पोर (megaspores) का उत्पादन होता है। यह विशेषता बीज धारण करने वाले पौधों (seed plants) के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है, क्योंकि यह लैंगिक विभेदन और अगली पीढ़ी के लिए बेहतर पोषण का मार्ग प्रशस्त करती है 9। इसके अतिरिक्त,

Selaginella moellendorffii प्रजाति को एक महत्वपूर्ण मॉडल जीव (model organism) के रूप में बड़े पैमाने पर अध्ययन किया गया है, जिससे संवहनी पौधों के विकास से जुड़े आनुवंशिक परिवर्तनों को समझने में मदद मिली है 3।


2. वर्गीकरण (Taxonomic Position)



2.1. वैज्ञानिक वर्गीकरण (Scientific Classification)


सिलेजिनेला का पादप जगत में स्थान इसकी अनूठी विशेषताओं पर आधारित है जो इसे अन्य समूहों से अलग करती है। इसका व्यवस्थित वर्गीकरण निम्नलिखित है:

Table 1: Selaginella का वर्गीकरण (Taxonomic Position of Selaginella)

Rank (पद)

Name (नाम)

Kingdom (जगत)

Plantae

Division (प्रभाग)

Lycopodiophyta

Class (वर्ग)

Lycopodiopsida

Order (गण)

Selaginellales

Family (कुल)

Selaginellaceae

Genus (जीनस)

Selaginella

यह वर्गीकरण सिलेजिनेला को पौधों के एक प्राचीन वंश में स्थापित करता है जो मॉस और फर्न के बीच एक मध्यवर्ती स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है 11।


2.2. वर्गीकरण का आधार एवं व्याख्या (Basis and Explanation of Classification)


सिलेजिनेला का वर्गीकरण मुख्य रूप से दो प्रमुख रूपात्मक लक्षणों पर आधारित है जो इसे लाइकोपोडिएसी (Lycopodiaceae) या क्लबमॉस से स्पष्ट रूप से अलग करते हैं। पहला, सिलेजिनेला की प्रत्येक पत्ती की ऊपरी (adaxial) सतह पर आधार के पास एक छोटी, झिल्लीदार संरचना होती है जिसे लिग्यूल (ligule) कहा जाता है 3। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण लक्षण विषमबीजाणुता (

heterospory) है, यानी दो प्रकार के बीजाणुओं का उत्पादन, जबकि लाइकोपोडिएसी के सदस्य समबीजाणुक (homosporous) होते हैं 3। सिलेजिनेला का अपने गण (Selaginellales) और कुल (Selaginellaceae) का एकमात्र जीवित जीनस होना इसके वर्गीकरण को और भी महत्वपूर्ण बना देता है 2। यह वर्गीकरण संबंधी अलगाव यह दर्शाता है कि सिलेजिनेला एक अद्वितीय विकासवादी वंश का "अंतिम उत्तरजीवी" है। इसके निकटतम रिश्तेदार भूवैज्ञानिक समय के दौरान विलुप्त हो गए हैं, जिससे यह पादप जीवन की एक ऐसी शाखा में एक अमूल्य खिड़की बन गया है जो अन्यथा केवल जीवाश्मों से ही जानी जाती। इस प्रकार, सिलेजिनेला केवल कई जेनेरा में से एक नहीं है; यह पौधों के एक पूरे गण का एकमात्र प्रतिनिधि है, जो इसके जीव विज्ञान के अध्ययन के महत्व को बढ़ाता है। जीनस को आगे दो मुख्य उप-जेनेरा में विभाजित किया गया है:

Homoeophyllum, जिसमें सभी पत्तियाँ आकार में समान होती हैं और सर्पिल रूप से व्यवस्थित होती हैं, और Heterophyllum, जिसमें दो प्रकार की पत्तियाँ (पृष्ठीय और अधरीय) होती हैं 6।


3. आकृतिक लक्षण (Morphological Features)



3.1. स्पोरोफाइट पादप काय (The Sporophytic Plant Body)


सिलेजिनेला का मुख्य पादप काय स्पोरोफाइट (sporophyte) होता है, जो द्विगुणित () होता है। यह एक शाकीय (herbaceous), सदाबहार और आमतौर पर नाजुक पौधा है, जो जड़, तना और पत्तियों में स्पष्ट रूप से विभेदित होता है 7। यह पीढ़ी जीवन चक्र में प्रभावी (

dominant) होती है और प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से आत्मनिर्भर होती है।


3.2. तना (Stem)


सिलेजिनेला का तना आमतौर पर पतला, हरा और अत्यधिक शाखित होता है। शाखाएँ द्विभाजी (dichotomous) होती हैं, हालांकि कभी-कभी एक शाखा के अधिक प्रबल विकास के कारण यह एकलाक्ष (monopodial) प्रतीत हो सकता है 6। तने की वृद्धि की आदत प्रजातियों के अनुसार भिन्न होती है; यह विसर्पी (

prostrate), अर्ध-उन्नत (sub-erect) या सीधा (erect) हो सकता है 1। सीधी प्रजातियाँ, जैसे

S. rupestris, उप-जीनस Homoeophyllum के अंतर्गत आती हैं और रेडियल समरूपता प्रदर्शित करती हैं। इसके विपरीत, विसर्पी प्रजातियाँ, जैसे S. kraussiana, उप-जीनस Heterophyllum में वर्गीकृत की जाती हैं और पृष्ठाधार (dorsiventral) समरूपता दिखाती हैं 6।


3.3. पत्तियाँ (Leaves) - होमोफिलस, हेटेरोफिलस एवं लिग्यूल की संरचना (Homophyllous, Heterophyllous, and Structure of Ligule)


सिलेजिनेला की पत्तियाँ छोटी, सरल और अवृंत (sessile) होती हैं, जिन्हें माइक्रोफिल्स (microphylls) कहा जाता है। प्रत्येक माइक्रोफिल में एक ही अशाखित मध्यशिरा (midrib) होती है 6। पत्तियों की व्यवस्था के आधार पर, सिलेजिनेला को दो समूहों में बांटा गया है।

Homoeophyllum उप-जीनस की प्रजातियों में सभी पत्तियाँ आकार और आकृति में समान होती हैं (होमोफिलस, homophyllous) और तने पर सर्पिल रूप से व्यवस्थित होती हैं 2।

Heterophyllum उप-जीनस की प्रजातियों में पत्तियाँ द्विरूपी (dimorphic) या हेटेरोफिलस (heterophyllous) होती हैं। इनमें चार पंक्तियों में पत्तियाँ होती हैं: तने की पृष्ठीय (dorsal) सतह पर दो पंक्तियों में छोटी पत्तियाँ और अधरीय (ventral) सतह पर दो पंक्तियों में बड़ी पत्तियाँ 2।

सिलेजिनेला की प्रत्येक पत्ती (वनस्पति और बीजाणुपर्ण दोनों) के आधार के पास ऊपरी (adaxial) सतह पर एक छोटा, झिल्लीदार, जीभ जैसा उपांग होता है जिसे लिग्यूल (ligule) कहते हैं 3। यह सिलेजिनेला की एक विशिष्ट पहचान है। एक परिपक्व लिग्यूल की संरचना में तीन भाग होते हैं: एक आधारीय ग्लोसोपोडियम (

glossopodium), जो पत्ती के ऊतक में धँसा होता है, मध्य क्षेत्र, और एक शीर्ष भाग 7। माना जाता है कि लिग्यूल युवा पत्तियों और बीजाणुधानियों की रक्षा करता है और संभवतः जल स्राव या अवशोषण में भी भूमिका निभाता है।


3.4. राइजोफोर (Rhizophore) - संरचना एवं प्रकृति पर विभिन्न मत (Structure and Different Views on its Nature)


राइजोफोर (Rhizophore) सिलेजिनेला की एक और रहस्यमय और अनूठी संरचना है। यह एक लंबी, रंगहीन, पत्ती रहित, अशाखित और बेलनाकार संरचना है जो आमतौर पर तने के द्विभाजन बिंदु से उत्पन्न होती है और सकारात्मक गुरुत्वाकर्षण (positively geotropic) के साथ नीचे की ओर बढ़ती है 7। जब इसका सिरा मिट्टी के संपर्क में आता है, तो यह अपस्थानिक जड़ों (

adventitious roots) का एक गुच्छा विकसित करता है 7। इसकी रूपात्मक प्रकृति वनस्पति विज्ञानियों के बीच लंबे समय से बहस का विषय रही है, जिसके परिणामस्वरूप तीन मुख्य परिकल्पनाएँ सामने आई हैं:

  1. कैपलेस रूट परिकल्पना (Capless root hypothesis): इस मत के अनुसार, राइजोफोर एक जड़ है जिसमें मूल गोप (root cap) का अभाव होता है। इसके पक्ष में तर्क यह है कि यह सकारात्मक गुरुत्वाकर्षी है, पत्ती रहित है, और इसकी आंतरिक शारीरिक रचना जड़ के समान है 1।

  2. पत्ती रहित प्ररोह परिकल्पना (Leafless shoot hypothesis): इस मत के समर्थकों का तर्क है कि राइजोफोर एक संशोधित तना है। इसके पक्ष में प्रमाण यह है कि इसमें मूल गोप और मूल रोम का अभाव होता है, इसकी उत्पत्ति बहिर्जात (exogenous) होती है, और प्रायोगिक परिस्थितियों में इसे एक पत्तीदार प्ररोह में विकसित होने के लिए प्रेरित किया जा सकता है 7।

  3. सुई-जेनेरिस परिकल्पना (Sui-generis hypothesis): यह परिकल्पना प्रस्तावित करती है कि राइजोफोर न तो जड़ है और न ही तना, बल्कि यह एक अद्वितीय अंग (organ sui-generis) है, जिसका पादप जगत में कहीं और कोई समानांतर नहीं है 1।

इसकी अस्पष्ट पहचान ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह एक विकासवादी नवाचार है जो रूपात्मक और कार्यात्मक लचीलापन प्रदान करता है, जिससे पौधा अपने सब्सट्रेट का कुशलतापूर्वक पता लगा सकता है, खुद को स्थिर कर सकता है, और पर्यावरणीय संकेतों के जवाब में कायिक रूप से फैल सकता है।


3.5. जड़ें (Roots)


सिलेजिनेला में जड़ें अपस्थानिक (adventitious) होती हैं और आमतौर पर राइजोफोर के सिरों से निकलती हैं। कुछ प्रजातियों में, वे सीधे तने से भी उत्पन्न हो सकती हैं 6। इनकी उत्पत्ति अंतर्जात (

endogenous) होती है, और ये द्विभाजी रूप से शाखित होती हैं। जड़ों में मूल गोप (root caps) और जल अवशोषण के लिए एककोशिकीय मूल रोम (root hairs) पाए जाते हैं 6।


4. आंतरिक संरचना (Internal Structure / Anatomy)



4.1. तने की आंतरिक संरचना (Anatomy of the Stem)


सिलेजिनेला के तने की अनुप्रस्थ काट (transverse section) एक जटिल और विशिष्ट आंतरिक संरचना को प्रकट करती है। सबसे बाहरी परत एक-कोशिकीय एपिडर्मिस (epidermis) होती है, जो क्यूटिकल (cuticle) से ढकी होती है 16। इसके नीचे कॉर्टेक्स (

cortex) का एक क्षेत्र होता है, जो कुछ प्रजातियों में पूरी तरह से पैरेन्काइमेटस (parenchymatous) होता है, जबकि अन्य में यह एक बाहरी स्क्लेरेन्काइमेटस (sclerenchymatous) हाइपोडर्मिस और एक आंतरिक पैरेन्काइमेटस क्षेत्र में विभेदित होता है 16।

तने की सबसे अनूठी विशेषता इसका संवहन तंत्र या स्टील (stele) है। स्टील आमतौर पर प्रोटोस्टील (protostele) प्रकार का होता है, जिसमें जाइलम (xylem) केंद्र में होता है और फ्लोएम (phloem) द्वारा घिरा रहता है 1। प्रजातियों के आधार पर स्टील की संख्या भिन्न हो सकती है; यह मोनोस्टेलिक (

monostelic, एक स्टील), डाइस्टेलिक (distelic, दो स्टील), या पॉलीस्टेलिक (polystelic, कई स्टील) हो सकता है 16। एक और असाधारण विशेषता यह है कि स्टील कॉर्टेक्स से एक बड़े वायु अवकाश (

air space) द्वारा अलग होता है और केंद्र में विशेष, रेडियल रूप से लम्बी कोशिकाओं द्वारा निलंबित रहता है जिन्हें ट्रैबिक्यूले (trabeculae) कहा जाता है 1। ये ट्रैबिक्यूले एंडोडर्मिस (

endodermis) की संशोधित कोशिकाएँ हैं और इन पर कैस्पेरियन स्ट्रिप्स (Casparian strips) मौजूद होती हैं, जो जल और विलेय के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं 18। यह संरचनात्मक व्यवस्था एक परिष्कृत शारीरिक अनुकूलन है, जो न्यूनतम ऊतक द्रव्यमान के साथ यांत्रिक समर्थन और विनियमित परिवहन प्रदान करती है, और संभवतः आंतरिक वातन को भी बढ़ाती है।


4.2. जड़ की आंतरिक संरचना (Anatomy of the Root)


तने की तुलना में, जड़ की आंतरिक संरचना अपेक्षाकृत सरल होती है। इसमें एक बाहरी एपिडर्मिस होती है जिससे मूल रोम निकलते हैं, एक चौड़ा पैरेन्काइमेटस कॉर्टेक्स, एक स्पष्ट एंडोडर्मिस, पेरिसाइकल (pericycle), और केंद्र में एक प्रोटोस्टील होता है 6। स्टील में जाइलम एक्सआर्च (

exarch) और मोनार्च (monarch) होता है, जिसका अर्थ है कि एक ही प्रोटोजाइलम समूह परिधि की ओर स्थित होता है 6।


4.3. राइजोफोर की आंतरिक संरचना (Anatomy of the Rhizophore)


राइजोफोर की आंतरिक संरचना काफी हद तक जड़ के समान होती है, जिसमें एक मोनार्च और एक्सआर्च प्रोटोस्टील होता है। हालांकि, यह जड़ से इस मायने में भिन्न है कि इसकी एपिडर्मिस पर मोटी क्यूटिकल होती है और इसमें मूल रोम का अभाव होता है 17। यह शारीरिक समानता "कैपलेस रूट" परिकल्पना का समर्थन करती है।


4.4. पत्ती की आंतरिक संरचना (Anatomy of the Leaf)


पत्ती की आंतरिक संरचना बहुत सरल होती है, जो इसके माइक्रोफिलस प्रकृति को दर्शाती है। इसमें एक ऊपरी और एक निचली एपिडर्मिस होती है। दोनों एपिडर्मिस की कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट होते हैं, और रंध्र (stomata) आमतौर पर केवल निचली एपिडर्मिस तक ही सीमित होते हैं 6। एपिडर्मिस के बीच में मेसोफिल (

mesophyll) ऊतक होता है, जो पलिसेड और स्पंजी पैरेन्काइमा में अविभेदित होता है 17। केंद्र में एक एकल, संकेंद्रित (

concentric) संवहन बंडल होता है, जिसमें कुछ जाइलम ट्रेकीड्स फ्लोएम से घिरे होते हैं। यह पूरा बंडल एक बंडल शीथ (bundle sheath) द्वारा घिरा होता है 6।


5. प्रजनन (Reproduction)



5.1. कायिक प्रजनन (Vegetative Reproduction)


सिलेजिनेला कई तरीकों से कायिक रूप से प्रजनन करता है, जो इसे तेजी से फैलने और प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करता है। सामान्य विधियों में विखंडन (fragmentation), कंद (tubers), और विश्राम कलिकाएँ (resting buds) शामिल हैं 2। विखंडन में, पौधे का कोई भी हिस्सा, जैसे कि तने का टुकड़ा, अलग होकर एक नया पौधा बना सकता है। कंद और विश्राम कलिकाएँ प्रतिकूल मौसम की स्थिति, जैसे सूखा या ठंड, से बचने के लिए अनुकूलित संरचनाएँ हैं और अनुकूल परिस्थितियाँ लौटने पर अंकुरित होकर नए पौधे बनाती हैं 6।


5.2. लैंगिक प्रजनन एवं हेटेरोस्पोरी (Sexual Reproduction and Heterospory)


सिलेजिनेला लैंगिक रूप से बीजाणुओं (spores) द्वारा प्रजनन करता है और यह विषमबीजाणुक (heterosporous) होता है 21। इसका अर्थ है कि यह दो अलग-अलग प्रकार के बीजाणु उत्पन्न करता है:

  1. माइक्रोस्पोर्स (Microspores): ये छोटे आकार के, असंख्य बीजाणु होते हैं जो नर गैमेटोफाइट (male gametophyte) को जन्म देते हैं।

  2. मेगास्पोर्स (Megaspores): ये बड़े आकार के, कम संख्या में बीजाणु होते हैं जो मादा गैमेटोफाइट (female gametophyte) को जन्म देते हैं।

हेटेरोस्पोरी केवल दो अलग-अलग आकार के बीजाणु बनाने की एक विधि नहीं है; यह प्रजनन रणनीति में एक गहरा विकासवादी बदलाव है। यह संख्या के बजाय माता-पिता के निवेश और संतान के अस्तित्व को प्राथमिकता देता है। बड़े मेगास्पोर एक अच्छी तरह से पोषित बीज की तरह काम करते हैं; इसमें अधिक संग्रहीत भोजन होता है, जिससे परिणामी मादा गैमेटोफाइट और बाद में भ्रूण कम रोशनी और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी अंडरस्टोरी वातावरण में सफलतापूर्वक स्थापित हो सकते हैं। छोटे माइक्रोस्पोर उत्पादन में "सस्ते" होते हैं और निषेचन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रूप से फैल सकते हैं। यह एक कोशिकीय-स्तर के परिवर्तन (बीजाणु का आकार) को एक प्रमुख पारिस्थितिक चालक (प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा) और एक विशाल विकासवादी प्रवृत्ति (बीज की आदत की उत्पत्ति) से जोड़ता है।


5.3. स्ट्रोबिलस एवं बीजाणुधानियों की संरचना (Structure of Strobilus and Sporangia)


बीजाणुओं का उत्पादन विशेष थैली जैसी संरचनाओं में होता है जिन्हें बीजाणुधानी (sporangia) कहा जाता है। ये बीजाणुधानियाँ विशेष पत्तियों, जिन्हें बीजाणुपर्ण (sporophylls) कहा जाता है, की कक्ष (axil) में स्थित होती हैं 17। बीजाणुपर्ण आमतौर पर शाखाओं के सिरों पर संघनित होकर एक शंकु जैसी संरचना बनाते हैं जिसे स्ट्रोबिलस (

strobilus) या कोन (cone) कहा जाता है 2। एक ही स्ट्रोबिलस में दोनों प्रकार की बीजाणुधानियाँ हो सकती हैं: माइक्रोस्पोरैंगिया (

microsporangia), जो माइक्रोस्पोर्स का उत्पादन करती हैं, और मेगास्पोरैंगिया (megasporangia), जो मेगास्पोर्स का उत्पादन करती हैं 9।


5.4. माइक्रोस्पोर एवं मेगास्पोर का विकास (Development of Microspores and Megaspores)


माइक्रोस्पोरैंगियम के अंदर, कई माइक्रोस्पोर मातृ कोशिकाएँ (microspore mother cells) अर्धसूत्रीविभाजन (meiosis) से गुजरती हैं, जिससे बड़ी संख्या में अगुणित (haploid) माइक्रोस्पोर्स का निर्माण होता है 6। इसके विपरीत, मेगास्पोरैंगियम में, आमतौर पर कई मेगास्पोर मातृ कोशिकाओं में से केवल एक ही क्रियाशील रहती है। यह क्रियाशील कोशिका अर्धसूत्रीविभाजन द्वारा विभाजित होकर चार बड़े, अगुणित मेगास्पोर्स बनाती है 14।


6. जीवन चक्र (Life Cycle)



6.1. पीढ़ी एकान्तरण (Alternation of Generations)


सिलेजिनेला के जीवन चक्र में एक स्पष्ट पीढ़ी एकान्तरण (alternation of generations) होता है, जिसमें एक द्विगुणित () बीजाणुद्भिद् (sporophyte) पीढ़ी और एक अगुणित () युग्मकोद्भिद् (gametophyte) पीढ़ी एक दूसरे के बाद आती हैं 23। स्पोरोफाइट पीढ़ी प्रभावी (

dominant), दीर्घजीवी और स्वपोषी होती है, जबकि गैमेटोफाइट पीढ़ी अल्पकालिक और बहुत छोटी होती है। इस प्रकार के जीवन चक्र को हैप्लो-डिप्लोन्टिक (haplo-diplontic) कहा जाता है 14।


6.2. गैमेटोफाइट का विकास (Development of Gametophyte) - नर एवं मादा गैमेटोफाइट (Male and Female Gametophyte)


सिलेजिनेला में गैमेटोफाइट का विकास एंडोस्पोरिक (endosporic) होता है, अर्थात यह बीजाणु भित्ति के भीतर ही होता है। माइक्रोस्पोर अंकुरित होकर नर गैमेटोफाइट बनाता है। यह विकास माइक्रोस्पोरैंगियम के अंदर ही शुरू हो सकता है। एक परिपक्व नर गैमेटोफाइट में एक प्रोथैलियल कोशिका (prothallial cell) और एक एंथेरिडियम (antheridium) होता है, जो कई द्विकशाभिक (biflagellate) पुंमणु (antherozoids) का निर्माण करता है 2।

मेगास्पोर अंकुरित होकर मादा गैमेटोफाइट बनाता है। इसका विकास भी मेगास्पोरैंगियम के भीतर ही शुरू हो जाता है 23। मादा गैमेटोफाइट मेगास्पोर के भीतर विकसित होता है और इसमें बड़ी मात्रा में संग्रहीत भोजन होता है। परिपक्व होने पर, इसकी सतह पर कई स्त्रीधानी (

archegonia) विकसित होती हैं, जिनमें से प्रत्येक में एक अंड कोशिका (egg cell) होती है।


6.3. निषेचन (Fertilization)


निषेचन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य है 14। जब माइक्रोस्पोरैंगियम और मेगास्पोरैंगियम परिपक्व होकर फटते हैं, तो बीजाणु बाहर निकलते हैं। पुंमणु पानी में तैरकर स्त्रीधानी तक पहुँचते हैं। एक पुंमणु स्त्रीधानी की ग्रीवा से होकर अंड कोशिका तक पहुँचता है और उसके साथ संलयित हो जाता है। इस प्रक्रिया से एक द्विगुणित युग्मनज (

zygote) या ऊस्पोर (oospore) का निर्माण होता है 14।


6.4. भ्रूण का विकास एवं नए स्पोरोफाइट का निर्माण (Development of Embryo and Formation of New Sporophyte)


युग्मनज स्पोरोफाइट पीढ़ी की पहली कोशिका है। यह तुरंत विभाजित होना शुरू कर देता है और एक भ्रूण (embryo) में विकसित होता है। प्रारंभिक विकास मादा गैमेटोफाइट के भीतर होता है, जहाँ भ्रूण पोषण प्राप्त करता है। भ्रूण में एक निलंबक (suspensor), एक पाद (foot), बीजपत्र (cotyledons), और एक तना शीर्ष होता है 25। पाद मादा गैमेटोफाइट से पोषण अवशोषित करता है, जबकि निलंबक भ्रूण को पोषक ऊतक में गहराई तक धकेलता है। अंततः, भ्रूण एक नए, स्वतंत्र स्पोरोफाइट पौधे में विकसित होता है, और इस प्रकार जीवन चक्र पूरा होता है 25। सिलेजिनेला का जीवन चक्र बीजाणुद्भिद् द्वारा युग्मकोद्भिद् पीढ़ी की सुरक्षा और पोषण की दिशा में एक स्पष्ट विकासवादी प्रवृत्ति को प्रदर्शित करता है, जो बीज वाले पौधों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती चरण का प्रतिनिधित्व करता है।


7. आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्व (Economic and Ecological Importance)



7.1. पारिस्थितिक भूमिका (Ecological Role)


सिलेजिनेला अपने प्राकृतिक आवासों में महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिकाएँ निभाता है। इसकी विसर्पी वृद्धि की आदत और सघन चटाई बनाने की क्षमता मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करती है, जिससे यह एक प्रभावी मृदा संरक्षक (soil binder) बनता है 2। यह छोटे अकशेरुकी जीवों और सूक्ष्मजीवों के लिए एक सूक्ष्म आवास (

microhabitat) प्रदान करता है और वन तल पर पोषक चक्र (nutrient cycle) में योगदान देता है 2।


7.2. सजावटी एवं अन्य आर्थिक उपयोग (Ornamental and Other Economic Uses)


अपनी आकर्षक, फर्न जैसी पत्तियों के कारण, सिलेजिनेला की कई प्रजातियों को सजावटी पौधों के रूप में उगाया जाता है। वे विशेष रूप से टेरारियम (terrariums), ग्रीनहाउस और छायादार बगीचों के लिए लोकप्रिय हैं जहाँ वे एक सुंदर ग्राउंड कवर बनाते हैं 26। कुछ शुष्क प्रजातियों, जैसे "पुनर्जीवन पौधा", को उनकी नवीनता के लिए बेचा जाता है। कुछ संस्कृतियों में, इनका उपयोग शिल्प सामग्री के रूप में भी किया जाता है 28।


7.3. औषधीय महत्व एवं प्रमुख जैव-सक्रिय यौगिक (Medicinal Importance and Major Bio-active Compounds)


सिलेजिनेला का पारंपरिक चिकित्सा में एक लंबा और समृद्ध इतिहास है। भारत में, Selaginella bryopteris, जिसे 'संजीवनी' के नाम से जाना जाता है, का उपयोग इसके कायाकल्प और पुनर्जीवित करने वाले गुणों के लिए किया जाता है 26। दुनिया भर में विभिन्न प्रजातियों का उपयोग घाव भरने, मासिक धर्म संबंधी विकारों, यकृत रोगों, दस्त और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता रहा है 28।

इन औषधीय गुणों का आधार पौधे में पाए जाने वाले शक्तिशाली जैव-सक्रिय यौगिक हैं। सिलेजिनेला विशेष रूप से बाइफ्लेवोनॉइड्स (biflavonoids) से भरपूर होता है, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट (antioxidant), एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory), एंटी-कैंसर (anti-cancer), और एंटी-वायरल (antiviral) गुण प्रदर्शित करते हैं 28। यह समृद्ध रासायनिक शस्त्रागार कोई संयोग नहीं है, बल्कि इसके 300 मिलियन से अधिक वर्षों के लंबे विकासवादी इतिहास का उत्पाद है। लाखों वर्षों तक बदलते हुए शाकाहारियों, रोगजनकों और पर्यावरणीय तनावों के खिलाफ जीवित रहने के लिए एक परिष्कृत रासायनिक शस्त्रागार के विकास की आवश्यकता थी। आज मनुष्य जिन औषधीय गुणों का उपयोग करता है, वे लाखों वर्षों के सह-विकासवादी "रासायनिक युद्ध" का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।


8. विशेषताएँ और निष्कर्ष (Special Features and Conclusion)



8.1. Selaginella की अद्वितीय विशेषताएँ (Unique Features of Selaginella)


सिलेजिनेला कई अनूठी विशेषताओं के कारण पादप जगत में एक विशेष स्थान रखता है। इनमें से प्रमुख हैं: विषमबीजाणुता (heterospory) की उपस्थिति, जो बीज की आदत की ओर एक विकासवादी कदम है; प्रत्येक पत्ती पर लिग्यूल (ligule) की उपस्थिति; रहस्यमय राइजोफोर (rhizophore) संरचना; और ट्रैबिक्यूले (trabeculae) द्वारा निलंबित अद्वितीय स्टील (stele)।

शायद सबसे आकर्षक विशेषता कुछ ज़ेरोफिटिक प्रजातियों में पाई जाने वाली पोइकिलोहाइड्री (poikilohydry) है, जिसे "पुनर्जीवन" घटना के रूप में जाना जाता है। S. lepidophylla जैसी प्रजातियाँ लगभग पूर्ण निर्जलीकरण (95% तक नमी की हानि) से बच सकती हैं और वर्षों तक प्रसुप्त अवस्था में रह सकती हैं 3। जब पानी उपलब्ध होता है, तो वे कुछ ही घंटों में फिर से हरी-भरी और चयापचय रूप से सक्रिय हो जाती हैं 32। यह असाधारण क्षमता ट्रेहलोस (

trehalose) नामक एक सुरक्षात्मक शर्करा के संश्लेषण के कारण होती है, जो शुष्क अवस्था में कोशिकाओं और ऊतकों को क्षति से बचाती है 8। यह क्षमता सिलेजिनेला को एस्ट्रोबायोलॉजी और जलवायु-लचीला फसलों को विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल जीव बनाती है, क्योंकि यह अन्य जीवों में निर्जलीकरण सहिष्णुता को इंजीनियर करने के लिए एक ब्लूप्रिंट प्रदान करती है।


8.2. सारांश एवं निष्कर्ष (Summary and Conclusion)


निष्कर्षतः, सिलेजिनेला एक प्राचीन, विविध और विकासवादी रूप से महत्वपूर्ण जीनस है। यह आदिम संवहनी पौधों की विशेषताओं, जैसे कि मुक्त-बीजाणु प्रजनन, और उन्नत लक्षणों, जैसे कि विषमबीजाणुता और गैमेटोफाइट पीढ़ी की बढ़ी हुई सुरक्षा, का एक अनूठा संयोजन प्रदर्शित करता है। यह इसे संवहनी पौधों के विकास, विशेष रूप से बीज की आदत की उत्पत्ति का अध्ययन करने के लिए एक आदर्श विषय बनाता है। इसकी असाधारण पारिस्थितिक अनुकूलन क्षमता, जो इसे वर्षावनों से लेकर रेगिस्तानों तक में पनपने में सक्षम बनाती है, और इसकी समृद्ध औषधीय क्षमता, जो इसके प्राचीन रासायनिक सुरक्षा तंत्र से उत्पन्न होती है, वनस्पति विज्ञान और मानव कल्याण दोनों के लिए इसके निरंतर महत्व को रेखांकित करती है। एक "जीवित जीवाश्म" के रूप में, सिलेजिनेला हमें न केवल पृथ्वी के अतीत की एक झलक प्रदान करता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों, जैसे कि जलवायु परिवर्तन और रोग, के समाधान के लिए भी संभावित कुंजी रखता है।


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