B.Sc. Practical Notes: Physiology & Biochemistry
B.Sc. प्रायोगिक जंतु विज्ञान एवं जैव रसायन (B.Sc. Practical Zoology & Biochemistry)
प्रयोग 1: लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells - RBCs) की गणना
उद्देश्य (Aim)
दिए गए रक्त के नमूने में प्रति घन मिलीमीटर (per mm
3
) लाल रक्त कोशिकाओं (Erythrocytes) की कुल संख्या की गणना करना।
आवश्यक सामग्री (Requirements/Materials)
उपकरण (Apparatus): हीमोसाइटोमीटर (Haemocytometer) जिसमें इम्प्रूव्ड न्यूबॉर चैम्बर (Improved Neubauer's Chamber) हो, RBC पिपेट (Thoma pipette), कवरस्लिप (Coverslip), संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope), लैंसेट (Lancet), रुई (Cotton), स्पिरिट (Spirit) ।
अभिकर्मक (Reagent): RBC डाइल्यूटिंग फ्लूइड (RBC Diluting Fluid) जैसे हेम्स का घोल (Hayem's solution)।
Hayem's solution की संरचना: सोडियम सल्फेट (Na
2
SO
4
) - 2.5 g, सोडियम क्लोराइड (NaCl) - 0.5 g, मरक्यूरिक क्लोराइड (HgCl
2
) - 0.25 g, और आसुत जल (Distilled Water) - 100 ml ।
सिद्धांत (Principle)
रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बहुत अधिक होती है, सामान्यतः यह 4.5 से 6.1 मिलियन प्रति माइक्रोलीटर (μL) या घन मिलीमीटर (mm
3
) होती है । इतनी बड़ी संख्या को सीधे गिनना असंभव है । इसलिए, गणना को संभव बनाने के लिए रक्त को एक ज्ञात अनुपात, सामान्यतः 1:200, में एक आइसोटोनिक डाइल्यूटिंग फ्लूइड (isotonic diluting fluid) के साथ पतला (dilute) किया जाता है ।
Hayem's solution एक आइसोटोनिक घोल है, जो RBCs को फटने (lysis) या सिकुड़ने (crenation) से रोकता है, जिससे उनकी आकृति बनी रहती है। इसमें मौजूद मरक्यूरिक क्लोराइड एक संरक्षक (preservative) के रूप में कार्य करता है और सोडियम सल्फेट RBCs को एक-दूसरे से चिपकने (rouleaux formation) से रोकता है, ताकि प्रत्येक कोशिका को अलग-अलग गिना जा सके । इस पतले रक्त को Neubauer's chamber के एक मानकीकृत आयतन (standardized volume) में चार्ज किया जाता है और एक परिभाषित क्षेत्र (defined area) में कोशिकाओं की गणना की जाती है। इस गणना से प्रति mm
3
रक्त में RBCs की कुल संख्या का पता लगाया जाता है। गणना सूत्र में एक बड़ा गुणक (multiplier) होता है, इसलिए प्रक्रिया के हर चरण में सटीकता अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक छोटी सी गिनती की त्रुटि भी अंतिम परिणाम में एक बड़ी त्रुटि उत्पन्न कर सकती है ।
Diagram Name: Improved Neubauer's Chamber का Counting Grid और RBC Pipette.
प्रक्रिया (Procedure)
अपनी अनामिका उंगली (ring finger) के सिरे को स्पिरिट में भिगोई हुई रुई से अच्छी तरह साफ करें और सूखने दें।
एक रोगाणुरहित (sterilized) लैंसेट का उपयोग करके उंगली के सिरे पर हल्के से चुभाएं (prick) और रक्त की पहली बूंद को साफ रुई से पोंछ दें।
RBC पिपेट में सावधानी से रक्त को 0.5 के निशान तक खींचें ।
पिपेट की नोक को रुई से साफ करें ताकि बाहर कोई अतिरिक्त रक्त न लगा हो।
अब, पिपेट में 101 के निशान तक Hayem's solution खींचें। यह 1:200 का तनुकरण (dilution) प्रदान करता है ।
पिपेट को अपनी हथेलियों के बीच क्षैतिज रूप से (horizontally) रखकर 2-3 मिनट तक धीरे-धीरे घुमाएं ताकि रक्त और घोल अच्छी तरह मिल जाएं ।
Neubauer's chamber और कवरस्लिप को साफ और सूखा रखें। कवरस्लिप को चैम्बर के ऊपर रखें।
पिपेट से पहली 2-3 बूंदें बाहर निकाल दें। फिर, पिपेट की नोक को कवरस्लिप के किनारे से 45° के कोण पर स्पर्श करें और घोल की एक बूंद को चैम्बर में भरने दें ।
चैम्बर को 2-3 मिनट के लिए स्थिर रहने दें ताकि कोशिकाएं सतह पर बैठ (settle) जाएं ।
सूक्ष्मदर्शी को पहले low power (10X) और फिर high power (40X) पर फोकस करें।
Central square के पांच छोटे वर्गों (चार कोने वाले और एक केंद्रीय वर्ग) में मौजूद RBCs की गणना करें ।
अवलोकन एवं गणना (Observations & Calculation)
गिने गए 5 छोटे वर्गों (कुल 80 सबसे छोटे वर्ग) में RBCs की कुल संख्या को 'N' के रूप में नोट करें।
गणना सूत्र (Calculation Formula): $$ \text{Total RBCs/mm}^3 = \frac{\text{गिनी गई कोशिकाओं की संख्या (N)} \times \text{Dilution Factor}}{\text{गिने गए क्षेत्र का आयतन}} $$ $$ \text{Total RBCs/mm}^3 = \frac{N \times 200}{\frac{1}{5} mm^2 \times \frac{1}{10} mm} = N \times 200 \times 50 = N \times 10,000 $$ उदाहरण के लिए, यदि N = 520 है, तो कुल RBCs = 520×10,000=5,200,000 या 5.2 मिलियन/mm³ ।
परिणाम/निष्कर्ष (Result/Conclusion)
दिए गए रक्त के नमूने में लाल रक्त कोशिकाओं की कुल संख्या _______ मिलियन/mm³ है। (सामान्य सीमा - पुरुष: 4.7 – 6.1 मिलियन/mm³, महिला: 4.2 – 5.4 मिलियन/mm³) ।
प्रयोग 2: श्वेत रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells - WBCs) की गणना
उद्देश्य (Aim)
दिए गए रक्त के नमूने में प्रति घन मिलीमीटर (per mm
3
) श्वेत रक्त कोशिकाओं (Leukocytes) की कुल संख्या की गणना करना।
आवश्यक सामग्री (Requirements/Materials)
उपकरण (Apparatus): हीमोसाइटोमीटर (Haemocytometer) जिसमें इम्प्रूव्ड न्यूबॉर चैम्बर हो, WBC पिपेट (Thoma pipette), कवरस्लिप, संयुक्त सूक्ष्मदर्शी, लैंसेट, रुई, स्पिरिट ।
अभिकर्मक (Reagent): WBC डाइल्यूटिंग फ्लूइड (WBC Diluting Fluid) या टर्क का घोल (Turk's solution)।
Turk's solution की संरचना: ग्लेशियल एसिटिक एसिड (Glacial Acetic Acid) - 2 ml, 1% जेंटियन वायलेट (Gentian Violet) घोल - 1 ml, और आसुत जल (Distilled Water) - 97 ml ।
सिद्धांत (Principle)
WBCs की संख्या RBCs की तुलना में बहुत कम होती है (सामान्यतः 4,000 से 11,000 प्रति mm
3
) । इस कम सांद्रता के कारण, रक्त का तनुकरण भी कम होता है, आमतौर पर 1:20 के अनुपात में। इस प्रयोग में Turk's solution का उपयोग किया जाता है, जिसका कार्य RBCs के लिए उपयोग होने वाले Hayem's solution से मौलिक रूप से भिन्न है। Turk's solution में मौजूद ग्लेशियल एसिटिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की झिल्ली को नष्ट कर देता है (hemolysis), जिससे वे गिनती के दौरान दिखाई नहीं देतीं और WBCs की गिनती में बाधा नहीं डालतीं । जेंटियन वायलेट या मेथिलिन ब्लू एक अभिरंजक (stain) है जो WBCs के केंद्रक (nuclei) को रंग देता है, जिससे वे सूक्ष्मदर्शी के नीचे आसानी से पहचाने और गिने जा सकते हैं । पतले रक्त को Neubauer's chamber में चार्ज किया जाता है और चार बड़े कोने वाले वर्गों (corner squares) में WBCs की गणना की जाती है।
Diagram Name: Neubauer's Chamber में WBC Counting Area और WBC Pipette.
प्रक्रिया (Procedure)
RBC गणना की तरह ही उंगली से रक्त का नमूना लें।
WBC पिपेट में रक्त को 0.5 के निशान तक खींचें।
पिपेट के बाहर लगे अतिरिक्त रक्त को साफ करें और फिर 11 के निशान तक Turk's solution खींचें। यह 1:20 का तनुकरण प्रदान करता है ।
पिपेट को 2-3 मिनट तक अच्छी तरह मिलाएं ताकि सभी RBCs नष्ट हो जाएं ।
Neubauer's chamber को साफ करके उस पर कवरस्लिप रखें।
पिपेट से पहली 2-3 बूंदें बाहर निकाल दें और फिर चैम्बर को चार्ज करें।
चैम्बर को 2-3 मिनट तक स्थिर रहने दें ताकि WBCs सतह पर बैठ जाएं ।
सूक्ष्मदर्शी को low power (10X) पर फोकस करें।
Counting grid के चार बड़े कोने वाले वर्गों (four large corner squares) में मौजूद WBCs की गणना करें ।
अवलोकन एवं गणना (Observations & Calculation)
गिने गए 4 बड़े वर्गों में WBCs की कुल संख्या को 'N' के रूप में नोट करें।
गणना सूत्र (Calculation Formula): $$ \text{Total WBCs/mm}^3 = \frac{\text{गिनी गई कोशिकाओं की संख्या (N)} \times \text{Dilution Factor}}{\text{गिने गए क्षेत्र का आयतन}} $$ $$ \text{Total WBCs/mm}^3 = \frac{N \times 20}{4 \times (1 mm \times 1 mm \times \frac{1}{10} mm)} = \frac{N \times 20}{0.4 mm^3} = N \times 50 $$ उदाहरण के लिए, यदि N = 150 है, तो कुल WBCs = 150×50=7,500/mm
3
।
परिणाम/निष्कर्ष (Result/Conclusion)
दिए गए रक्त के नमूने में श्वेत रक्त कोशिकाओं की कुल संख्या _______ /mm³ है। (सामान्य सीमा: 4,000 - 11,000 cells/mm³) ।
प्रयोग 3 & 4: ABO रक्त समूह एवं स्वयं के रक्त समूह का निर्धारण
उद्देश्य (Aim)
दिए गए रक्त के नमूने (या स्वयं के रक्त) में ABO और Rh रक्त समूह का निर्धारण करना।
आवश्यक सामग्री (Requirements/Materials)
साफ कांच की स्लाइड (Clean glass slide), लैंसेट (Lancet), रुई (Cotton), स्पिरिट (Spirit), टूथपिक्स (Toothpicks) या एप्लीकेटर स्टिक्स, और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज (Monoclonal Antibodies): एंटी-ए (Anti-A), एंटी-बी (Anti-B), और एंटी-डी (Anti-D) ।
सिद्धांत (Principle)
यह परीक्षण एंटीजन-एंटीबॉडी समूहन (Antigen-Antibody Agglutination) प्रतिक्रिया पर आधारित है । मानव RBCs की सतह पर A, B, और Rh (D) जैसे वंशानुगत एंटीजन (antigens) हो सकते हैं। रक्त प्लाज्मा में इन एंटीजन के विरुद्ध प्राकृतिक एंटीबॉडीज (agglutinins) होती हैं (जैसे, ग्रुप A के व्यक्ति में Anti-B एंटीबॉडी) । जब RBCs को उनके संगत एंटीसीरम (antiserum), जिसमें विशिष्ट एंटीबॉडी होती है, के साथ मिलाया जाता है, तो एंटीजन-एंटीबॉडी प्रतिक्रिया के कारण समूहन (agglutination) या कोशिकाओं का गुच्छा बनना होता है। उदाहरण के लिए, यदि रक्त में A एंटीजन है, तो यह Anti-A सीरम के साथ समूहन करेगा। यदि D (Rh) एंटीजन मौजूद है, तो यह Anti-D सीरम के साथ समूहन करेगा, जिससे रक्त समूह Rh-पॉजिटिव निर्धारित होता है ।
प्रक्रिया (Procedure)
एक साफ कांच की स्लाइड लें और उस पर मार्कर से तीन स्थान A, B, और D (या Rh) चिह्नित करें ।
चिह्नित स्थान 'A' पर Anti-A की एक बूंद, 'B' पर Anti-B की एक बूंद, और 'D' पर Anti-D की एक बूंद डालें ।
उंगली को स्पिरिट से साफ करके लैंसेट से चुभाएं और प्रत्येक एंटीसीरम की बूंद में रक्त की एक छोटी बूंद सावधानी से डालें।
प्रत्येक मिश्रण के लिए एक अलग साफ टूथपिक का उपयोग करके रक्त और एंटीसीरम को अच्छी तरह मिलाएं ।
स्लाइड को धीरे-धीरे हिलाएं और 1-2 मिनट तक समूहन (agglutination) के लिए निरीक्षण करें।
अवलोकन (Observations)
प्रत्येक मिश्रण में समूहन (गुच्छे बनना) की उपस्थिति (+) या अनुपस्थिति (-) को नोट करें। परिणामों की व्याख्या निम्न तालिका के अनुसार की जाती है, जो देखे गए प्रतिक्रिया पैटर्न को एक निश्चित रक्त समूह से सीधे जोड़कर व्याख्यात्मक त्रुटि को कम करती है।
रक्त की बूँद + Anti-A | रक्त की बूँद + Anti-B | रक्त की बूँद + Anti-D (Rh) | रक्त समूह (Blood Group) |
Agglutination (+) | No Agglutination (-) | Agglutination (+) | A Positive (A+) |
Agglutination (+) | No Agglutination (-) | No Agglutination (-) | A Negative (A-) |
No Agglutination (-) | Agglutination (+) | Agglutination (+) | B Positive (B+) |
No Agglutination (-) | Agglutination (+) | No Agglutination (-) | B Negative (B-) |
Agglutination (+) | Agglutination (+) | Agglutination (+) | AB Positive (AB+) |
Agglutination (+) | Agglutination (+) | No Agglutination (-) | AB Negative (AB-) |
No Agglutination (-) | No Agglutination (-) | Agglutination (+) | O Positive (O+) |
No Agglutination (-) | No Agglutination (-) | No Agglutination (-) | O Negative (O-) |
परिणाम/निष्कर्ष (Result/Conclusion)
अवलोकन तालिका के अनुसार, दिए गए रक्त के नमूने का रक्त समूह _______ है। मेरे स्वयं के रक्त का समूह _______ है।
प्रयोग 5: हीमिन क्रिस्टल (Haemin Crystals) का निर्माण
उद्देश्य (Aim)
दिए गए रक्त के नमूने से हीमिन (Teichmann's crystals) क्रिस्टल तैयार करना।
आवश्यक सामग्री (Requirements/Materials)
कांच की स्लाइड (Glass slide), कवरस्लिप (Coverslip), स्पिरिट लैंप (Spirit lamp), ड्रॉपर (Dropper), सूक्ष्मदर्शी (Microscope), लैंसेट (Lancet), रुई (Cotton), और निप्पे का अभिकर्मक (Nippe's Reagent) या ग्लेशियल एसिटिक एसिड (Glacial Acetic Acid) ।
सिद्धांत (Principle)
हीमोग्लोबिन में 'हीम' (Haem) नामक एक गैर-प्रोटीन भाग होता है, जिसमें लौह (Iron) फेरस (Fe
2+
) अवस्था में होता है । जब रक्त को ग्लेशियल एसिटिक एसिड और एक क्लोराइड स्रोत (जैसे Nippe's reagent में KCl) के साथ गर्म किया जाता है, तो RBCs फट जाते हैं और हीमोग्लोबिन बाहर निकलता है । गर्मी और एसिड के प्रभाव से ग्लोबिन प्रोटीन विकृत (denature) हो जाता है, और हीम का Fe
2+
आयन फेरिक (Fe
3+
) अवस्था में ऑक्सीकृत हो जाता है, जिससे हीमेटिन (Haematin) बनता है । यह हीमेटिन क्लोराइड आयनों के साथ प्रतिक्रिया करके हीमिन (Haemin) या फेरिक क्लोराइड हीम बनाता है, जो गहरे भूरे, विषमकोण (rhomboid) क्रिस्टल के रूप में अवक्षेपित होता है। यह रक्त की उपस्थिति के लिए एक निश्चित परीक्षण (confirmatory test) है और इसका उपयोग फोरेंसिक विज्ञान में किया जाता है ।
प्रक्रिया (Procedure)
एक साफ कांच की स्लाइड पर रक्त की एक बूंद लें और इसे हवा में पूरी तरह सूखने दें ।
सूखे रक्त के धब्बे पर Nippe's reagent (या Glacial Acetic Acid) की 2-3 बूंदें डालें और उस पर एक कवरस्लिप रख दें ।
स्लाइड को स्पिरिट लैंप की लौ पर धीरे-धीरे तब तक गर्म करें जब तक कि घोल में उबाल न आने लगे या बुलबुले न दिखने लगें। स्लाइड को ज़्यादा गरम करने से बचें ।
स्लाइड को आंच से हटाकर कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें ।
सूक्ष्मदर्शी के नीचे पहले low power (10X) और फिर high power (40X) में क्रिस्टल का निरीक्षण करें।
अवलोकन (Observations)
सूक्ष्मदर्शी के नीचे गहरे भूरे या चॉकलेट रंग के, सुई या विषमकोण के आकार के हीमिन क्रिस्टल दिखाई देंगे ।
Diagram Name: Haemin Crystals under Microscope.
परिणाम/निष्कर्ष (Result/Conclusion)
दिए गए रक्त के नमूने से हीमिन क्रिस्टल सफलतापूर्वक तैयार किए गए, जो रक्त की उपस्थिति की पुष्टि करता है।
प्रयोग 6: कार्बोहाइड्रेट का गुणात्मक परीक्षण (Qualitative Test for Carbohydrates)
उद्देश्य (Aim)
दिए गए नमूने में कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति का पता लगाने के लिए विभिन्न गुणात्मक परीक्षण करना।
A. मोलिस्क का परीक्षण (Molisch's Test) - General test for carbohydrates
सिद्धांत (Principle): सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड (H
2
SO
4
) कार्बोहाइड्रेट को निर्जलित (dehydrate) करके फरफ्यूरल (furfural) (पेन्टोस से) या 5-हाइड्रॉक्सीमिथाइलफरफ्यूरल (hexose से) बनाता है। ये एल्डिहाइड, मोलिस्क अभिकर्मक (α-naphthol) के साथ संघनित (condense) होकर एक बैंगनी रंग का जटिल यौगिक (complex) बनाते हैं ।
आवश्यक सामग्री (Requirements): परखनली (Test tubes), पिपेट (Pipettes), नमूना घोल (Sample solution), मोलिस्क अभिकर्मक (Molisch's reagent), सांद्र H
2
SO
4
।
प्रक्रिया (Procedure): एक परखनली में 2 ml नमूना घोल लें और उसमें मोलिस्क अभिकर्मक की 2-3 बूंदें मिलाएं। परखनली को तिरछा करके उसकी दीवार के सहारे धीरे-धीरे 1 ml सांद्र H
2
SO
4
डालें ताकि दो अलग-अलग परतें बनें ।
अवलोकन (Observation): दोनों तरल पदार्थों के जंक्शन पर एक बैंगनी या वायलेट रंग की रिंग का बनना कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति को इंगित करता है ।
B. बेनेडिक्ट का परीक्षण (Benedict's Test) - Test for reducing sugars
सिद्धांत (Principle): अपचायक शर्करा (Reducing sugars), जिनमें मुक्त एल्डिहाइड या कीटोन समूह होता है, क्षारीय माध्यम में गर्म करने पर बेनेडिक्ट अभिकर्मक में मौजूद क्यूप्रिक आयनों (Cu
2+
, नीला) को क्यूप्रस आयनों (Cu
+
) में अपचयित (reduce) कर देते हैं, जो क्यूप्रस ऑक्साइड (Cu
2
O) के रूप में एक ईंट-लाल (brick-red) अवक्षेप (precipitate) बनाता है ।
आवश्यक सामग्री (Requirements): परखनली, ड्रॉपर, जल ऊष्मक (Water bath), नमूना घोल, बेनेडिक्ट अभिकर्मक (Benedict's reagent) ।
प्रक्रिया (Procedure): एक परखनली में 2 ml बेनेडिक्ट अभिकर्मक लें और उसमें नमूना घोल की 5-8 बूंदें मिलाएं। मिश्रण को 3-5 मिनट के लिए उबलते हुए जल ऊष्मक में गर्म करें ।
अवलोकन (Observation): घोल के रंग का नीले से हरा, पीला, नारंगी या ईंट-लाल में बदलना अपचायक शर्करा की उपस्थिति को इंगित करता है। रंग की तीव्रता शर्करा की मात्रा पर निर्भर करती है ।
C. आयोडीन परीक्षण (Iodine Test) - Test for starch
सिद्धांत (Principle): स्टार्च (एक पॉलीसेकेराइड) में एमाइलोज (amylose) नामक एक सर्पिल (helical) संरचना होती है। आयोडीन के अणु इस हेलिक्स के अंदर फंसकर एक गहरा नीला-काला स्टार्च-आयोडाइड कॉम्प्लेक्स बनाते हैं ।
आवश्यक सामग्री (Requirements): परखनली, ड्रॉपर, नमूना घोल, आयोडीन घोल (Iodine solution)।
प्रक्रिया (Procedure): एक परखनली में 2 ml नमूना घोल लें और उसमें आयोडीन घोल की 2-3 बूंदें मिलाएं।
अवलोकन (Observation): गहरे नीले या काले रंग का उत्पन्न होना स्टार्च की उपस्थिति की पुष्टि करता है ।
परिणाम/निष्कर्ष (Result/Conclusion)
दिए गए नमूने ने मोलिस्क परीक्षण के लिए ________ (सकारात्मक/नकारात्मक) परिणाम दिया।
दिए गए नमूने ने बेनेडिक्ट परीक्षण के लिए ________ (सकारात्मक/नकारात्मक) परिणाम दिया।
दिए गए नमूने ने आयोडीन परीक्षण के लिए ________ (सकारात्मक/नकारात्मक) परिणाम दिया।
अतः, दिया गया नमूना एक ________ (कार्बोहाइड्रेट/अपचायक शर्करा/स्टार्च) है।
प्रयोग 7: प्रोटीन का गुणात्मक परीक्षण (Qualitative Test for Proteins)
उद्देश्य (Aim)
दिए गए नमूने में प्रोटीन और अमीनो एसिड की उपस्थिति का पता लगाने के लिए विभिन्न गुणात्मक परीक्षण करना।
A. बाययूरेट परीक्षण (Biuret Test) - Test for peptide bonds
सिद्धांत (Principle): क्षारीय माध्यम में, दो या दो से अधिक पेप्टाइड बॉन्ड वाले यौगिक बाययूरेट अभिकर्मक में मौजूद कॉपर (II) आयनों (Cu
2+
) के साथ एक बैंगनी रंग का समन्वय कॉम्प्लेक्स (coordination complex) बनाते हैं। यह प्रोटीन की उपस्थिति की पुष्टि करता है क्योंकि उनमें कई पेप्टाइड बॉन्ड होते हैं ।
आवश्यक सामग्री (Requirements): परखनली, नमूना घोल (जैसे, अंडे की सफेदी का घोल), 10% NaOH घोल, 1% CuSO
4
घोल ।
प्रक्रिया (Procedure): एक परखनली में 2 ml नमूना घोल लें और उसमें 2 ml 10% NaOH घोल डालकर अच्छी तरह मिलाएं। फिर बूंद-बूंद करके 1% CuSO
4
घोल डालें और हर बूंद के बाद हिलाएं ।
अवलोकन (Observation): बैंगनी या वायलेट रंग का उत्पन्न होना प्रोटीन की उपस्थिति को इंगित करता है ।
B. निनहाइड्रिन परीक्षण (Ninhydrin Test) - Test for α-amino acids
सिद्धांत (Principle): निनहाइड्रिन, α-अमीनो एसिड के साथ प्रतिक्रिया करके एक गहरा नीला या बैंगनी रंग का उत्पाद बनाता है जिसे रूहेमान्स पर्पल (Ruhemann's purple) कहा जाता है। यह परीक्षण प्रोटीन, पेप्टाइड और अमीनो एसिड सभी के लिए सकारात्मक होता है ।
प्रक्रिया (Procedure): एक परखनली में 1 ml नमूना घोल लें और उसमें निनहाइड्रिन अभिकर्मक की कुछ बूंदें मिलाएं। मिश्रण को 1-2 मिनट तक उबालें ।
अवलोकन (Observation): नीले-बैंगनी रंग का उत्पन्न होना α-अमीनो एसिड की उपस्थिति को इंगित करता है ।
C. ज़ैंथोप्रोटिक परीक्षण (Xanthoproteic Test) - Test for aromatic amino acids
सिद्धांत (Principle): सांद्र नाइट्रिक एसिड (HNO
3
) उन अमीनो एसिड के साथ प्रतिक्रिया करता है जिनमें एरोमैटिक रिंग होती हैं (जैसे टायरोसिन, ट्रिप्टोफैन)। यह नाइट्रेसन प्रतिक्रिया एक पीला अवक्षेप बनाती है, जो क्षार (alkali) मिलाने पर नारंगी हो जाता है ।
प्रक्रिया (Procedure): एक परखनली में 2 ml नमूना घोल लें, उसमें 1 ml सांद्र HNO
3
मिलाएं और धीरे-धीरे गर्म करें। ठंडा करके सावधानी से NaOH घोल मिलाएं ।
अवलोकन (Observation): पीले रंग का बनना और फिर क्षार मिलाने पर नारंगी हो जाना एरोमैटिक अमीनो एसिड की उपस्थिति को इंगित करता है ।
परिणाम/निष्कर्ष (Result/Conclusion)
दिए गए नमूने ने बाययूरेट परीक्षण के लिए ________ परिणाम दिया, जो ________ की उपस्थिति/अनुपस्थिति को दर्शाता है।
दिए गए नमूने ने निनहाइड्रिन परीक्षण के लिए ________ परिणाम दिया, जो ________ की उपस्थिति/अनुपस्थिति को दर्शाता है।
दिए गए नमूने ने ज़ैंथोप्रोटिक परीक्षण के लिए ________ परिणाम दिया, जो ________ की उपस्थिति/अनुपस्थिति को दर्शाता है।
प्रयोग 8: लिपिड का गुणात्मक परीक्षण (Qualitative Test for Lipids)
उद्देश्य (Aim)
दिए गए नमूने में वसा और तेल (lipids) की उपस्थिति का पता लगाना।
ये तीन परीक्षण लिपिड के विभिन्न मौलिक गुणों का मूल्यांकन करते हैं, जिससे उनकी पहचान अधिक विश्वसनीय होती है। घुलनशीलता परीक्षण ध्रुवीयता (polarity) पर आधारित है, पारभासी धब्बा परीक्षण उनके गैर-वाष्पशील (non-volatile) भौतिक गुण पर आधारित है, और सूडान III परीक्षण एक विशिष्ट लाइसोक्रोम डाई की हाइड्रोफोबिक अणुओं के प्रति आत्मीयता पर आधारित है।
A. विलेयता परीक्षण (Solubility Test)
सिद्धांत (Principle): लिपिड गैर-ध्रुवीय (non-polar) कार्बनिक अणु होते हैं, इसलिए वे गैर-ध्रुवीय विलायकों (जैसे क्लोरोफॉर्म, ईथर) में घुलनशील (soluble) होते हैं और ध्रुवीय विलायकों (जैसे पानी) में अघुलनशील (insoluble) होते हैं ।
प्रक्रिया (Procedure): तीन परखनलियों में नमूने (जैसे, तेल की कुछ बूंदें) लें। एक में पानी, दूसरे में इथेनॉल और तीसरे में क्लोरोफॉर्म मिलाएं और अच्छी तरह हिलाएं।
अवलोकन (Observation): नमूना क्लोरोफॉर्म में घुल जाएगा, पानी में अघुलनशील रहेगा (ऊपर एक परत बनाएगा), और इथेनॉल में आंशिक रूप से घुलनशील हो सकता है ।
B. पारभासी धब्बा परीक्षण (Translucent Spot Test)
सिद्धांत (Principle): लिपिड वाष्पशील (non-volatile) नहीं होते हैं और कागज को चिकना (greasy) बना देते हैं, जिससे एक पारभासी (translucent) धब्बा बनता है जो सूखने पर गायब नहीं होता है, जबकि पानी का धब्बा सूखने पर गायब हो जाता है ।
प्रक्रिया (Procedure): फिल्टर पेपर के एक टुकड़े पर नमूने की एक बूंद डालें और इसे रगड़ें।
अवलोकन (Observation): कागज पर एक स्थायी पारभासी धब्बे का बनना लिपिड की उपस्थिति को इंगित करता है ।
C. सूडान III परीक्षण (Sudan III Test)
सिद्धांत (Principle): सूडान III एक वसा-विलेय (fat-soluble) डाई है जो लिपिड में घुलकर उन्हें लाल या नारंगी रंग प्रदान करती है। यह लिपिड के लिए एक विशिष्ट अभिरंजक (stain) है ।
प्रक्रिया (Procedure): एक परखनली में 2 ml नमूना घोल (पानी में तेल का निलंबन) लें और उसमें सूडान III अभिकर्मक की 2-3 बूंदें मिलाएं और अच्छी तरह हिलाएं।
अवलोकन (Observation): लाल या नारंगी रंग की बूंदों (globules) का दिखना लिपिड की उपस्थिति की पुष्टि करता है ।
परिणाम/निष्कर्ष (Result/Conclusion)
दिए गए नमूने ने विलेयता, पारभासी धब्बे, और सूडान III परीक्षणों के लिए ________ (सकारात्मक/नकारात्मक) परिणाम दिए।
अतः, दिया गया नमूना एक लिपिड है